Heart or Mind. Whom to Listen ? दिल या दिमाग किसकी सुने ?


समस्या तब आती है जब आपका दिल कुछ कहे और दिमाग कुछ और | ऐसी स्थिति अमूमन सभी के साथ होता है | अक्सर लोग चिंतिति रहते है की आखिर किसकी बात मानी जाए दिल या दिमाग की | पर मज़ा तब है जब दिल और दिमाग दोनों किसी एक काम पर राजी हो जाएं, तब उस काम को करना आपके लिए काफी आसान हो जाता है और उस काम को हम 100 % दे पाते है | 

वैसे आप! किसकी सुनते है, दिल या दिमाग की ? आप किसी एक सुनते है तो समस्या आएगी, दिल की सुनेगें तो दिमाग रुकावट पैदा कर देगा और जब दिमाग की सुनेगें तो दिल हल्ला मचाना शुरू कर देगा | तो हम किसकी सुने इसके लिए कोई भी फैसला करने से पहले ये दो चीजे (दिल और दिमाग) जरूर दुरुस्त कर लें |



1.)  दिल या मन को कण्ट्रोल करना सीखें, उसे कल्पनाओ की दुनियाँ में न भटकाएं, मन को स्थिर रखे, क्यूंकि स्थिर मन ही सही फैसला ले सकता है और  2.)  अपने दिमाग को ट्रैंड करें, उसे अच्छी-अच्छी बातों का खुराक दें, उसे ऐसे ट्रैंड करें की आपके मन या दिल जो भी फैसला करे उसके लिए आपका दिमाग सही रास्ता तैयार कर सके |

मैं यहाँ बताना चाहूंगा कि बचपन से ही उन चीजों की ओर ध्यान देने बोला गया जो सदियों से चली आ रही है | हमारा समाज अभी भी सिर्फ किसी सरकारी नौकरी में अच्छे पोस्ट पे पहुंच जाने को ही कामयाबी मानती है | हमें बचपन से डॉक्टर, इंजीनियर बनने को लेकर ऐसे ऐसे उदहारण दिए जाते है कि हमें वाक़ई मे लगने  लगता है - अगर डॉक्टर या इंजीनियर नहीं बन पाए तो माता पिता के साथ साथ अपने रिश्तेदारों और समाज के लिए भी नाकामयाब समझे जाएगें | नतीजा हम असफलता से इतना डरने लगते है कि कुछ नया करने की कोशिश नहीं करते | अपने लिए एक सुरक्षित घेरा बना कर चलते है |  

ये भी सच है की जैसे-जैसे हम बड़े होते है, हमें और भी दूसरी चीजों की जानकारी मिलने लगती है उसके अनुसार हमारे क्या बनने की इक्षा में भी परिवर्तन होना शुरू हो जाता है | स्कूल से कॉलेज लाइफ में आते-आते कई तरह के नौकरी के बारे में भी पता चलता है पर उस समय हम कंफ्यूज हो जाते है की मुझे कौन सा फिल्ड को अपनाना चाहिए | अमूमन ऐसी समस्या उन स्टूडेंट के सामने ज्यादा आती है जो गावं से शहर पढ़ने के लिए आते है | हमारी शिक्षा प्रणाली ही ऐसी है जिसमे सिर्फ किताबो की भरमार है पर हमारी प्रयोगात्मक चीजों पे कम ध्यान दिया जाता है | अतः हम किताबों को पढ़ कर सिर्फ कल्पनाओं की दुनियां में सैर करते रहते है और कंफ्यूज रहते है | और एक दिन हमारी कॉलेज लाइफ भी समाप्त हो जाती है | अच्छे कॉलेज में है या नार्मल कॉलेज में चाहे आप किसी कॉम्पिटेटिव एग्जाम का तैयारी कर रहे है इन सभी जगह से निकलने के बाद हमे जो जॉब ऑफर किये जाते है उस जॉब के पाते ही हमें ट्रेनिंग के लिए भेजा जाता है | जब हमें अंत में ट्रेनिंग कर के ही जॉब करनी थी तो फिर इतने किताबी ज्ञान का क्या? सोंचने वाली बात है पर इसका मतलब ये नहीं की किताब से बिलकुल किनारा कर लेना चाहिए! बिलकुल नहीं | हमारा कहने का मतलब यह है कि हमे बचपन से वो व्यवस्था मिलनी चाहिए जहाँ पे किताब में पढ़ी गई चीजों का प्रयोग कर सके तभी हमें अपने अंदर के हुनर को पहचानने का मौका मिलेगा तभी हम दुनियाँ के सामने अपनी काबिलियत साबित कर पायेगें | और उससे मिली मोटिवेशन ही हमें आगे बढ़ाएगा | तो हमें किताबी कीड़ा बन के नहीं रह जाना बल्कि किताब में लिखी गई बातो का प्रयोग करना भी जरुरी है |



पर यहाँ हम उन नौकरी पेशा वाले लोगो की भी बात होना जरुरी है जो अपनी ईक्षाओ को मार कर आगे तो बढ़ आये है और अच्छी नौकरी भी लग गई पर वो नहीं कर पाए या बन पाए जो बनना या करना चाहते थे | इससे वो सिर्फ अपने साथ डिप्रेशन लिए घूमते रहते है क्योंकि वो सिर्फ पैसे के लिए अपनी इक्षाओं को दवाए रखते है | तो कृप्याकर आप अपनी इक्षाओं को मत मरने दें उसे जवान ही रहने दें | और अभी से शुरुआत कर दें, समय लगेगा पर आपको कामयाबी हाथ जरूर लगेगी  क्यूंकि आप के दिल ने बचपन से उसे करना चाहा है जो कही न कही आप के अंदर दबी कई सालों से दबी थी | उठे और उसपे थोड़ा थोड़ा काम करना शुरू कर दें.| इसके लिए आप को अपना काम या जॉब छोड़ने की कोई जरुरत नहीं , बस जो भी करें थोड़ा ही करे, थोड़ी देर ही करें पर  पुरे दिल से करें




जो भी आपके दिल कहे वही चुनें. जैसे :-




1. किसी को पेंटिंग बनाने का शौक है तो वो फ्री समय में कैनवास पे काम कर सकते है और उसको किसी प्रदर्शनी में शामिल करने के लिए आवेदन कर सकते है या उसे सोशल मीडिया पे दाल सकते है




2. किसी को लिखने का शौक है तो वे अपना ब्लॉग्गिंग स्टार्ट कर सकते है और उसपे अपना कंटेंट दाल कर सोशल मीडिया पे शेयर कर सकते है




3. अगर आप समाज सेवा करना चाहते है तो अपने आसपास के लोगों का ग्रुप बना कर कुछ भी सोशल एक्टिविटी स्टार्ट कर सकते है उससे आपको समाज में एक पहचान मिलेगी |




4. अगर आप को पर्यावरण के प्रति लगाव है तो आप पेड़ लगाने का काम कर सकते है और इस तरह के कार्यकर्म में हिस्सा ले कर अपनी बात रख सकते है |




और भी बहुत कुछ है बस अपना हॉबी पहचाने और उसपे धीरे धीरे काम करना शुरू कर दें और इसके लिए आप को जॉब छोड़ने की भी कोई जरुरत नहीं होगी बस फ्री टाइम में ये सब कर करते रहे है अपने आप को आगे रखे धीरे धीरे ही सही उसका फल जरूर मिलेगा |  कर के देखिये अच्छा लगेगा |




बेहतर करें, अच्छा करें, सब अच्छा होगा |




धन्यवाद |



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