जब आप अच्छे और सच्चे होगें, तभी चमत्कार होगा ! achha kren achha hoga!

कुछ साल पहले मैं एक प्राइवेट स्कूल में हिन्दी का टीचर था। स्कूल और स्कूल के डायरेक्टर से काफी ज़्यादा लगाव के कारण मैं कई-कई दिन स्कूल के हॉस्टल में ही रुक जाया करता था। उस हॉस्टल में कई छात्र रहते थे। मुझे अपने कामो से वेहद प्यार था। हाँ, सैलरी कम थी पर कहते है न जिस काम में मन लगने लगे वहाँ सैलरी की कोई कीमत नहीं होती है, बस सच्चे मन से अपना काम कर रहा था। यह मेरी पहली नौकरी थी। पहले मैं अंतर्मुखी था, पर मेरा हिन्दी साहित्य का टीचर होना ही मेरे स्वभाव और बोलने की शैली में जैसे चमत्कार ला रहा था। क्योंकि साहित्य में बहुत-सी अच्छी बाते होती है जिसे समझने का भरपूर मौका मिला और इस तरह साहित्य से प्रेरित होकर मैं धीरे-धीरे हिन्दू धर्मग्रन्थ का भी अध्ययन करने लगा। साहित्य और धर्मग्रन्थ का प्रभाव मेरे अंतर्मन पर अधिक पड़ा। जिससे मैं अपने अंदर एक बेहतरीन सकारात्मक बदलाव महसूस करने लगा। मेरे बात करने और बोलने के तरीके में बहुत परिवर्तन दिखने लगा था। किसी कार्यकर्म, क्लास या पेरेंट्स के सामने मेरे द्वारा जो भी शब्द बोले जाते थे वह सभी को बहुत प्रभाभित करते थे। कई चीजों में तो चमत्कारी परिवर्तन होते हुए मैंने खुद देखा | जब आप अच्छे होते है न तो आपके जरिए अच्छा ही होता है | 



आइये एक सच्ची घटना से जानते है कि कुछ भी साधन न होते हुए भी ईश्वर की आशीर्वाद से किसी के लिए आप भी मददगार साबित हो सकते है। बस आप जो कर रहे है उसपे विश्वाश होनी चाहिए | 

रात के 12 बज रहे थे। ठंड का मौसम था हॉस्टल के सभी छात्र सो रहे थे। मुझे नींद आने ही वाली थी की तभी मैंने किसी की सिसकने की आवाज सुनी। उस रात ठण्ड इतनी थी की मैं अपनी जगह से उठने से इंकार करते हुए उसकी सिसकने की आवाज को अनसुना कर सोने को चेष्टा करने लगा। मैंने अपना मुँह पूरी तरह रजाई के अंदर लपेट लिया था। रजाई के अंदर होते हुए भी मैंने महसूस किया उसकी रोने के आवाज और तेज होने लगी। जैसा कि बताया उस रात ठण्ड बहुत थी। मैंने अपने जगह पर लेटे-लेटे आवाज दी कौन है? क्या हुआ? क्यों रहे हो? पर कोइ जवाब नहीं मिला अब फिर से उसकी रोने की आवाज अब सिसकियों में बदल गई थी। शायद उसने अपने किसी भयानक दर्द को बर्दास्त कर लिया हो ताकि मेरे शिक्षक को कोई परेशानी न हो। पर वह भयानक दर्द उसे फिर से रोने पर मजबूर कर दिया, इस बार उसकी रोने की आवाज और ज़्यादा तेज थी। सारे स्टूडेंट ऐसे सो रहे थे मानो कई दिनों से नहीं सोया हो। मुझसे अब रहा नहीं गया। मैंने अपना शाल ओढ़ कर उसके पास पंहुचा और बहुत ही प्यार से पूछा क्या हुआ, क्यों रो रहे हो? उसने कलपते हुए स्वर में बोला, "सर मेरे बाएँ कान में बहुत तेज दर्द कर रहा है"।


मैंने फ़ौरन हॉस्टल में रखे मेडिकल बॉक्स खोला पर उसमे रुई और डेटॉल के सिवा कुछ भी नहीं था। मैं फिर उसके पास पहुँचकर बोला मैं ऊपर सर से पूछ के आता हूँ शायद उनके पास कोई दवा होगी पर जब सीढ़ियों के पंहुचा तो देखा दरवाजे पर अंदर से ताला लगा हुआ हैं। मैंने कई बार आवाज लगाई पर कोई फ़ायदा नहीं। मुझे लौटकर उसके पास आना पड़ा। इस बार वह रोने के साथ-साथ छटपटा भी रहा था शायद उसके कान का दर्द और तेज हो रहा था। अब मुझे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं, कैसे इसकी मदद करूं। फिर कुछ सोच कर उसके करीब बैठ गया और बोला कुछ नहीं होगा तुम अपनी आँख बंदकर सोने की कोशिश करो ठीक है, उसने ऐसा ही किया पर उसकी कराहटें हुए स्वर और छहपटाहट अभी भी थी। मैंने उसके कानों के पास अपनी तीन ऊँगली से हल्का-हल्का स्पर्श करना शुरू किया फिर ईश्वर से आग्रह किया कि इसको दर्द से निजात दिला दें। हाँ, उस वक्त मुझे सिर्फ गयात्री मंत्र याद था बस उसे ही बार-बार दोहराये जा रहा था और अपने उंगलियों से उसके कानों के पास हल्का स्पर्श जारी रखा, मुश्किल से 5 से 10 मिनिट हुए होंगें, मैंने देखा वह एक गहरी नींद में सो चूका था। मैं फिर धीरे से उठा और ईश्वर को धन्यवाद किया और अपने बिस्तर पर जा को लेट गया।

सुबह जब मैंने स्कूल के प्लेग्राउंड में उसे खेलते हुए देखा तो मन को एक अजीब-सा आनंद महसूस हुआ।
और वह आनंद कई आनंद से बढ़कर था | 

पर मैं सोचने लगा, कल रात जो लड़का काफी देर तक दर्द से कराह रहा था एकाएक उसे नींद कैसे आ गई थी !

दोस्तों !
जब हम अपने अंदर उन चीजों को जगह देते है जो सिर्फ़ व सिर्फ़ अच्छाई और सच्चाई है | कोई छल-कपट नहीं, न ही किसी को तकलीफ देना, जो काम कर रहे है उसमे खुश रहना सीख लेते हैं। अच्छी साहित्य, महाभारत, रामायण और श्री भगवत गीता आदि जैसे धर्मग्रन्थ का अध्धयन करने लगते है। तब आप अपने अंदर एक सकारात्मक परिवर्तन होते हुए देखते हैं, अपने अंदर आनंद महसूस करते है। आपके आस-पास जो लोग रहते है उनके प्रति आप का नजरिया भी सकारात्मक हो जाता है। आपके लिए सही ग़लत में फर्क करना संभव हो जाता है। तभी आप अपने और अपने समाज के लिए सही निर्णय ले पाते है। फिर आप जो भी बोलते है या करते है उसमे ईश्वर भी आपके साथ होता है फिर आप ईश्वर द्वारा दीन-दुखी को मदद करने वाला माध्यम हो जाते है। और फिर आपके माध्यम से कभी-कभी कुछ ऐसा चमत्कार होता है जिसपे लोगों को विश्वास नहीं होता।

ये तो एक छोटी-सी कहानी थी जिसमे ये बताया गया कि पहले आप हाथ तो बढ़ाए किसी के मदद के लिए फिर ईश्वर आपकी जरूर मदद करेगा। फिर आप के द्वारा जो चमत्कार होगा उसपे आपको भी विश्वाश नहीं होगा।

इस तरह का चमत्कार आपके साथ भी हुआ होगा | अगर ऐसा है तो हमें लिख भेजिए हम अपने ब्लॉग पर आपके ऐसे ही कहानी प्रकाशित करेगें।
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