इस LOCKDOWN में खुद के लिए अवसर कैसे तलाश करें ? (How to find opportunities for yourself in this LOCKDOWN?)


दोस्तों आज पूरी दुनियां इस Corona जैसे भयानक महामारी का सामना कर रहा है | इस महामारी को अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश भी रोकने में नाकाम रहा है | हमारे देश भारत में भी Corona के मरीजों की संख्या दिन पर दिन बढ़ती जा रही है | दिल्ली-मुंबई जैसे शहर के मजदूर अपने घर को पलायन कर रहे है | छोटी बड़ी लगभग सभी कंपनी अपने कर्मचारी को पैसे देने में नाकाम हो रहे है अतः जिनका जॉब छूट रहा है वो भी अपने घर को निकल रहे है | आने वाले दिनों में स्थिति और बुरी होने वाली है | इस  LOCKDOWN में छोटे-बड़े सभी उधोग धंधों पे असर पड़ा है | अब ऐसे हालत में आप अपने आप को कैंसे संतुलित रख सकते है? कैसे अपने आप को एक नई दिशा दे सकते है और अपने लिए नए अवसर तलाश सकते है | आइए जानते हैं !





"संकट में बुद्धिमान नहीं, वो बचेगा जिसमे अनुकूलन की क्षमता अधिक हो, जिसने परिस्तिथियों के अनुकूल अपने आप को ढाल लिया हो - चाणक्य ''

अगर आप भी इस LOCKDOWN के कारण हताश और निराश है तो चाणक्य द्वारा कही गई बाते और ये लेख आप के लिए बहुत महत्वपूर्ण है |

इस  LOCKDOWN में मजदूर, प्राइवेट कर्मचारी, छोटे व्यापारी और छोटी स्टार्टअप कम्पनी ज्यादा प्रभाभित हुई है, फिर भी आपको हताश याा निराश नहीं होना चाहिए जरा सोचिए, ये हालात सिर्फ आप के साथ नहीं है इससे छोटे-बड़े सभी लोग प्रभाभित है | क्यों न हम इसको एक अवसर के रूप में देखे ? नजरिया को जरा बदले चीजों के देखने समझने में अपनी काबिलियत का प्रयोग करें | क्या हुआ? "जॉब चली गई ? वो आज तक बॉस के कहे अनुसार ही काम करते आए थे न तो इस बार जरा अपना बॉस खुद बने | आप के पास कोई तो काबिलियत होगी जिसको इतने दिनों से उजागर करना चाहते थे यही मौका है, अवसर है, उसमें अपना पूरा दिमाग और शक्ति झोंक दीजिये, इसमें खुद आप बॉस होंगे, खुद का फैसला होगा और खुद की कंपनी होगी, आप के निचे काम करने वाले लोग होगें | यही समय है अपने आप को एक चिंगारी देने का, LOCKDWON खत्म होने में अभी समय है अतः इस खाली समय का सदुपयोग करते हुए आप पूरा प्लान का खाका या पीपीटी तैयार कर सकते है और फिर LOCKDWON को खत्म होते ही एक नई  जिंदगी की शुरुआत कर सकते है |

करके देखिये मज़ा आएगा | आप आत्मनिर्भर होंगे, आप से कितनो लोगों को रोजगार मिलेगा जहाँ हैं वही से सुरु कर सकते है | हमारे प्रधानमंत्री जिस आत्मनिर्भर की बात कर रहे है जिस लोकल फॉर भोकल की बात कही जा रही है उसमे भी आपका योगदान सराहनीय होगा |

यहां हम एक उदारहरण से समझने की कोशिश करते है की कैसे अपने आत्मविश्वास के साथ आस पास जो चीजें है उसी को अपने आईडिया से बेहतर कर, एक ब्रांड रूप देकरअपनी कम्पनी खड़ा कर सकते है | 

रमेश बिहार के रहने वाला है, उसके पिता एक किसान है उनके पास अच्छी खासी जमींन है जिसमे वो हल्दी, सरसो , मक्का, गेहूं आदि पैदा करते है और उसे व्यापारी को बेचकर अपना जीवन यापन करते है | पर रमेश घर से कई किलोमीटर दूर गुडगाँव के एक प्राइवेट कंपनी में मार्केटिंग डिपार्टमेंट में जॉब करता है, रमेश घर से दूर अकेला रहता है और हर महीने के अंत में उसे राशन खरीदने पास के दुकान जाना होता है जहाँ वो और सामान के साथ-साथ  आटा, सरसों तेल, हल्दी, चावल, दाल आदि खरीदता है और उस दुकानदार को पैसे देता है फिर कुछ सोचते हुए अपने फ्लैट की ओर निकल पड़ता है, फ्लैट पहुंच कर राशन का सामान सामने रख, दिमाग पे जोर देकर सोचने लगता है की मेरे पिताजी किसान है | पिताजी और उनके जैसे कई किसान जो आनाज पैदा करते है और उस आनाज को व्यापारी को बेचते है फिर वो व्यापारी कंपनी वाले को बेचते है फिर कंपनी वाले उसकी अच्छे से ब्रांडिंग और पैकेजिंग करके हमें ही दुगुने-तिगने दामों में बेच रहे है उसी समय रमेश का दिमाग ठनका, मैं बेकार में यहाँ 30 हजार का जॉब कर रहा हूँ क्यों न पिताजी के उपजाए आनाज को अच्छा सा कोई ब्रांड देकर उसकी सोशल मीडिया, पेपर में प्रचार कर उसको मार्किट में लाया जाय |  जिस तरह आटे और चावल के कई ब्रांड मार्किट में है उसी तरह अपना भी ब्रांड मार्किट में आए तो लोग जरूर खरीदेंगे अब उसके पास आईडिया था और 4 साल का EXPERIENCE था अतः उसने थोड़ा मार्किट का रिसर्च किया, प्लान बनाया और पास जो सेविंग थी उसको लिया और मन बनाकर अपने गॉव निकल गया वहां अपना एक छोटा सा सेटअप तैयार किया, और पूरी निष्ठां के साथ काम करने में लग गया पहले पास के शहरो में फिर धीरे धीरे अपना बिज़नेस बढ़ाने लगा और देखते ही देखते उसका ब्रांड पुरे राज्य के राशन दुकानों पर मिलने लगा और इसतरह गावं के लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा किया अब उस गॉव से मजदूर दिल्ली-मुंबई काम के तलाश में जाना बंद कर दिया अब उसे गॉव में ही रोजगार मिल गया |

अब रमेश के ब्रांड का अपना ही एक नाम है | इसतरह रमेश ने खुद को आत्मनिर्भर बनाया और साथ साथ कई लोगो के लिए रोजगार पैदा किया |

दोस्तों जब खुद पे आत्मविश्वास हो न तो काम के तलाश में कही भटकने की जरूरत नहीं है आपको अपने ही पैरों की निचे हीरे दबे हुए मिलेंगे बस उसको पहचानने की काबिलियत होनी चाहिए | 


अतः आज इस LOCKDOWN में आपके जैसे भी हालात हो अगर आप हीरो की पहचाने की काबिलियत रखते है तो आप इस  LOCKDOWN में अवसर की तलाश जरूर कर लेंगें  |

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